Kahani 


                            

कुछ इस तरह बयान हुआ हूँ, इक क़िस्सा बन गया हूँ ।

शब्दों की माला में पिरोया हुआ, वो धागा चीर सा गया है ।
सफ़राना जब शुरू हुआ, हर ज़बान ने बदला 

बेगाना हुआ ख़ुद से ही, रास्ता मेरा ।
क्या क़िस्सा क्या कहानी 

हर रंग में रंगा ।
किसी में राजा किसी में फ़क़ीर 

किसी में पूरा मैं, किसी में इक लकीर ।

 

वो इक सोच से जन्मा था

अब हज़ारों सोच के नीचे दब चुका हु ।
                 – UnsophisticatedBird

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